sarasvatti_ma

दोहा – Dohá

जनक जननि पदम दुरज, निज मस्तक पर धारि ।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि ।।

Janak janani padam duraj, nij mastak par dhári.
Bandaun Mátu Sarasvatí, buddhi bal de dátári.

पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु ।
रामसागर के पाप को, मातु तुही अब हन्तु ।।

Purna jagat men vyápt tav, mahimá amit anantu.
Rámságar ke páp ko, Mátu Tuhí ab hantu.

चौपाई – Chaupáí

जय श्रीसकल बुद्धि बलरासी ।
जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ।।

Jay shrísakal buddhi balarásí,
Jay sarvagya amar avináshí.

जय जय जय वीणाकार धारी ।
करती सदा सुहंस सवारी ।।

Jay jay jay vínákár dhárí,
Kartí sadá suhans savárí.

रुप चतुर्भुजधारी माता ।
सकल विश्व अन्दर विख्याता ।।

Rup chaturbhujdhárí Mátá,
Sakal vishva andar vikhyátá.

जग में पाप बुद्धि जब होती ।
तबही धर्म की फीकी ज्योति ।।

Jag men páp buddhi jab hotí,
Tabahi Dharma kí phíkí jyoti.

तबहि मातु का निज अवतारा ।
पाप हीन करती महि तारा ।।

Tabahi Mátu ká nij avatárá,
Páp hín kartí mahi tárá.

बाल्मीकि जी थे हत्यारा ।
तब प्रसाद जानै संसारा ।।

Bálmíki jí the hathyárá,
Tab prasád jánai sansárá.

रामचरित जो रचे बनाई ।
आदि कवि पदवी को पाई ।।

Ramchandarit jo rache banáí,
Ádi kavi padaví ko páí.

कालिदास जो भये विख्याता ।
तेरी कृपा दृष्टि से माता ।।

Kálidás jo bhaye vikhyátá,
Terí kripá drishti se Mátá.

तुलसी सूर आदि विद्वाना ।
भये और जो ज्ञानी नाना ।।

Tulsí súr ádi vidváná,
Bhaye aur jo gyání náná.

तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा ।
केवल कृपा आपकी अम्बा ।।

Tinha na aur raheu avalambá,
Keval kripá ápkí Amba.

करहु कृपा सोई मातु भवानी ।
दुखित दीन निज दासहि जानी ।।

Karahu kripá soí Mátu Bhavání,
Dukhit dín nij dásahi jání.

पुत्र करई अपराध बहूता ।
तेहि न धरइ चित सुन्दर माता ।।

Putra karaí aparádh bahútá,
Tehi na dharai chit sundar Mátá.

राखु लाज जननि अब मेरी ।
विनय करु भाँति बहुतेरी ।।

Rákhu láj janani ab merí,
Vinay karu bhánti bahuterí.

मैं अनाथ तेरी अवलंबा ।
कृपा करऊ जय जय जगदंबा ।।

Main anáth Terí avalambá,
Kripa karaú jay jay Jagadamba.

मधु कैटभ जो अति बलवाना ।
बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना ।।

Madhu Kaitabh jo ati balváná,
Báhuyuddh Vishnu se tháná.

समर हजार पांच में घोरा ।
फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा ।।

Samar hajár pánch men ghorá,
Phir bhí mukh unse nahin morá.

मातु सहाय कीन्ह तेहि काला ।
बुद्धि विपरीत भई खलहाला ।।

Mátu saháy kínha Tehi kálá,
Buddhi viparit bhaí khalahálá.

तेहि ते मृत्यु भई खल केरी ।
पुरवहु मातु मनोरथ मेरी ।।

Tehi te mrityu bhaí khal kerí,
Puravahu Mátu manorath merí.

चंड मुण्ड जो थे विख्याता ।
छण महु संहारेउ तेहि माता ।।

Chand mund jo the vikhyátá,
Chhan mahu sanháreu Tehi Mátá

रक्तबीज से समरथ पापी ।
सुरमुनि हृ्दय धरा सब काँपी ।।

Raktabíj se samrath pápí,
Surmuni hriday dhará sab kánpí.

काटेउ सिर जिम कदली खम्बा ।
बार बार बिनऊं जगदंबा ।।

Káteu sir jim kadalí khambá,
Bár bár binaún Jagdamba.

जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा ।
छण में वधे ताहि तू अम्बा ।।

Jagaprasiddh jo Shumbhanishumbhá,
Chhan men vadhe táhi Tú Amba.

भरत मातु बुद्धि फेरेऊ जाई ।
रामचन्द्र बनवास कराई ।।

Bharat Mátu buddhi phereú jáí,
Rámchandra banvás karáí.

एहिविधि रावन वध तू कीन्हा ।
सुर नर मुनि सबको सुख दीन्हा ।।

Ehividhi Rávan vadh Tú kínhá,
Sur nar muni sabako sukh dínhá.

को समरथ तव यश गुन गाना ।
निगम अनादि अनंत बखाना ।।

Ko samarath tav yash gun gáná,
Nigam anádi anant bakháná.

विष्णु रुद्र अज सकहिन मारी ।
जिनकी हो तुम रक्षाकारी ।।

Vishnu Rudra aj sakahin márí,
Jinakí ho Tum rakshakárí.

रक्त दन्तिका और शताक्षी ।
नाम अपार है दानव भक्षी ।।

Rakt Dantiká aur Shatákshí,
Nám apár hai dánav bhakshí.

दुर्गम काज धरा पर कीन्हा ।
दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा ।।

Durgam káj dhará par kínhá,
Durga nám sakal jag línhá.

दुर्ग आदि हरनी तू माता ।
कृपा करहु जब जब सुखदाता ।।

Durga ádi haraní Tú Mátá,
Kripá karahu jab jab sukhdátá.

नृप कोपित को मारन चाहै ।
कानन में घेरे मृग नाहै ।।

Nrip kopit ko máran cháhai,
Kánan men ghere mrig náhai.

सागर मध्य पोत के भंजे ।
अति तूफान नहिं कोऊ संगे ।।

Ságar madhya pot ke bhanje,
Ati túphán nahin koú sange.

भूत प्रेत बाधा या दु:ख में ।
हो दरिद्र अथवा संकट में ।।

Bhút pret bádhá yá dukh men,
Ho daridra athavá sankat men.

नाम जपे मंगल सब होई ।
संशय इसमें करइ न कोई ।।

Nám jape mangal sab hoí,
Sanshay ismen karai na koí.

पुत्रहीन जो आतुर भाई ।
सबै छाँडि पूजें एहि माई ।।

Putrahín jo átur bháí,
Sabai chándi pújen ehi máí.

करै पाठ नित यह चालीसा ।
होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा ।।

Karai páth nit yah chálísá,
Hoy putra sundar gun íshá.

धूपादिक नवैद्य चढ़ावै ।
संकट रहित अवश्य हो जावै ।।

Dhúpádik navaidya charhávai,
Sankat rahit avashya ho jávai.

भक्ति मातु की करैं हमेशा ।
निकट न आवै ताहि कलेशा ।।

Bhakti Mátu kí karai hameshá,
Nikat na ávai táhi kaleshá.

बंदी पाठ करें सत बारा ।
बंदी पाश दूर हो सारा ।।

Bandí páth karen sat bárá,
Bandi pásh dúr ho sárá.

रामसागर बाधि हेतु भवानी ।
कीजै कृपा दास निज जानी ।।

Rámaságar bádhi hetu Bhavání,
Kijai kripa dás nit jání.

दोहा – Dohá

मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप ।
डूबन से रक्षा करहु, परूँ न मैं भव कूप ।।

Mátu surya kánti tav, andhakár mam rúp.
Duban se raksha karahu, parún na main bhav kúp.

बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु ।
राम सागर अधम को आश्रम तू ही ददातु ।।

Bal buddhi vidya dehu mohi, sunahu Sarasvatí Mátu,
Ram ságar adham ko áshram Tú hí dadátu.