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माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रूंदे मोहे |
इक दिन ऐसा आयेगा, मैं रौंदूगी तोहे || 

Mátí kahe kumhár se, tú kyá rúnde mohe.
Ik din aisá áyegá, main raudúgí tohe. 

आए हैं तो जाएगे, राजा रंक फकीर |
एक सिहासन चढ़ चले, एक बन्धे जंजीर || 

Áe hain to jáyege, rája rank phakír,
Ek sihásan charh chale, ek bandhe janjír. 

चलती चाकी देखके, दिया कबीरा रोय |
दो पाटन के बीच में साबित रहा न कोय || 

Chaltí chákí dekhke, diyá kabírá roy,
Do pátan ke bich men sábit rahá na koy. 

पत्ता टूटा डाल से, ले गई पवन उड़ाय |
अबके बिछड़े कब मिलें, दूर पड़े हैं जाय || 

Patta tutá dál se, le gaí pavan uráy,
Abke bichhre kab milen, dúr pare hain jáy. 

दुःख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय |
जो सुख में सुमिरन करें, दुख काहे को होय || 

Dukh men sumiran sab kare, sukh men kare na koy,
Jo sukh men sumiran karen, dukh káhe ko hoy. 

तुलसी या संसार में, पांच रत्न हैं सार |
संत-संग अरु हरि भजन, दया, दान, उपकार || 

Tulsí ya sansár men, pánch ratna hain sár,
Sant sang aru Hari bhajan, daya, dán, upkár. 

तुलसी या संसार में, मतलब का व्यौहार |
जब लगि पैसा गाँठ में, तब लगि लाखों यार || 

Tulsí ya sansár men, matlab ká vyauhár,
Jab lagi paisá gánth men, tab lagi lákhon yár. 

दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान |
तुलसी दया न छोड़िये, जब लग घट में प्रान || 

Dayá dharma ká múl hai, páp múl abhimán.
Tulsí dayá na chhoriye, jab lag ghat men prán. 

राम नाम रटते रहो, जब लगि घट में प्रान |
कबहूं तो दीनदयाल के, भनक परेगी कान || 

Ram nám ratate raho, jab lagi ghat men prán.
Kabahún to díndayál ke, bhanak paregí kán.