हो रही है आरती राधेपति घन श्याम की |
गोपीवल्लभ मुरली-मनोहर केशव मुक्तिधाम की || 

Ho rahí hai ártí Rádhepati Ghanshyám kí,
Gopívallabh Murlí Manohar Keshav muktidhám kí. 

नीलाम्बर तन पर पीताम्बर, सोहे कमलों की माला |
मोर-मुकुट सिर ऊपर राजे, मोहन है मुरली वाला || 

Nílámbar tan par pitámbar, sohe kamlon kí málá,
Mor mukut sir úpar ráje, Mohan hai murlí válá. 

चरण युगल को शीश झुकाऊँ, रटन लगी हरि नाम की |
सुखकारी-दुखहारी जन की, दासी जिनकी है माया || 

Charan yugal ko shísh djhukáún, ratan lagí Hari nám kí.
Sukhkárí dukhhárí jan kí, dásí jinkí hai máyá. 

वेद पुराण सन्त जन सिगरे, अगुन सुगन गुन गाया |
प्रपंच माया शाखाहारी, जय सदा सुखधाम की || 

Ved Purán sant jan sigre, agun sugan gun gáyá.
Prapanch máyá shákháhárí, jay sadá sukhdhám kí. 

सेवत शेष शारदा शम्भु, ऋषि मुनि होगी ध्यानी ।
एक स्वर गायन करो, आरती कृपा निधान की ।। 

Sevat shesh Shárdá Shambhu, Rishi Mani hogí dhyání,
Ek svar gáyan karo, ártí Kripá Nidhán kí.