aumआज मिल सब गीत गाआो उस प्रभु के धन्यवाद ।
जिसका यश नित गाते हैं गंधर्व धन्यवाद ।। 

Áj mil sab gít gáo us Prabhu ko dhanyavád,
Jiská yash nit gáte hain Gandharva dhanyavád. 

मन्दिरों में कन्दरों में पर्वतों के शिखर पर ।
देते हैं लगातार सौ सौ बार मुनिवर धन्यवाद ।। 

Mandiron men kandaron men parvaton ke shikhar par,
Dete hain lagátár sau sau bár munivar dhanyavád. 

करते हैं जंगल में मंगल पक्षिगण इर शाख पर ।
पाते में आनन्द मिल गाते हैं स्वर भर धन्यवाद ।।

Karte hain jangal men mangal pakshigan ir shákh par,
Páte men ánand mil gáte hain svar bhar dhanyavád. 

कूएं में तालाब में सिन्धु की गहरी धार में ।
प्रेम रस में तृष्त हो करते हैं जलचर धन्यवाद ।।

Kúen men táláb men sindhu kí gahrí dhár men,
Prem ras men trisht ho karte hain jalchar dhanyavád. 

शादियों में जल्सयों में यज्ञ और उत्सव के आदि ।
मीठे स्वर से चाहिए करें नारी-नर सब धन्यवाद ।।

Shádiyon men jalsayon men yagya aur utsav ke ádí,
Míthe svar se cháhiye karen nárí-nar sab dhanyavád. 

गानकर अमीचन्द भजनानन्द ईश्वर की स्तुति ।
ध्यान धर सुनते हैं श्रोता कान धर धर धन्यवाद ।।

Gánkar amíchand bhajanánand íshvar kí shuti,
Dhyán dhar sunte hain shrota kán dhar dhar dhanyavád.